nashtar zakham lagata hai to nashtar se khulvaata hooñ | नश्तर ज़ख़्म लगाता है तो नश्तर से खुलवाता हूँ

  - Waheed Ahmad
नश्तरज़ख़्मलगाताहैतोनश्तरसेखुलवाताहूँ
सिलवाताहूँ
फनेरनीलउतारताहैतोमनकेमेंरिसवाताहूँ
खिंचवाताहूँ
पानीमेंगर्मीघोलताहै
तोपानीकाठंडाप्यालामँगवाताहूँ
जबशब-ए-ज़िंदा-दारीमेंमयचढ़तीहै
तोसुब्हसुबूहीकीसीढ़ीलगवाताहूँ
औरतचरकादेतीहैतोऔरतकोबुलवाताहूँ
दिखलाताहूँ
इकआदतकेघावपेदूसरीआदतबाँधाकरताहूँ
मैंऔरतकेज़ख़्मकेऊपरऔरतबाँधाकरताहूँ
  - Waheed Ahmad
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