har raushni ki boond pe lab rakh chuki hai raat | हर रौशनी की बूँद पे लब रख चुकी है रात

  - Wahab Danish
हररौशनीकीबूँदपेलबरखचुकीहैरात
बढ़नेलगेज़मींकीतरफ़तीरगीकेहात
जंगलखड़ेहैंभेदकेऔरअजनबीशजर
शाख़ेंनहींसलीबकिदुश्वारहैनजात
होकेकभीउदासयहाँबैठतातोथा
चलकेकिसीदरख़्तसेपूछेंतोउसकीबात
हाथोंमेंगरनहींतोनिगाहोंकोदीजिए
उससाहिब-ए-निसाब-ए-बदनसेकोईज़कात
इनपर्बतोंकेबीचथीमस्तूरइकगुफा
पत्थरकीनरमियोंमेंथीमहफ़ूज़काएनात
  - Wahab Danish
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