zaraa se gham ko ye log itnaa badha chadha kar dikha rahe hain | ज़रा से ग़म को ये लोग इतना बढ़ा चढ़ा कर दिखा रहे हैं

  - Vishesh asthana
ज़रासेग़मकोयेलोगइतनाबढ़ाचढ़ाकरदिखारहेहैं
येआजकलकेयहाँकेलौंडेहमेंमोहब्बतसिखारहेहैं
तेरेदिएवोबदनकेछालेमेरेबदनपरपड़ेहुएहैं
नहींभरेंगेइसेकभीहमयहीमोहब्बतनिभारहेहैं
करोमोहब्बतयेशानसेतुमख़ुदाकहोइश्क़मेंउसेतुम
किजानधड़कनगुलाबहमदमयेतोसभीहीबुलारहेहैं
किसेपड़ीहैतिरेयहाँपरयेदर्दअपनेछुपाकेरखतू
पतानहींयेचलेकिसीकोकिकिसलिएमुस्कुरारहेहैं
मुझेतिरेहुस्नकीयेबदबूयहाँपरेशानकररहीहै
नहींथेइतनेवोख़ूब-सूरतकिलोगजितनेबतारहेहैं
वोख़ुशबहुतहैंमेरेबिनाभीयेदेखअच्छालगाहमेंपर
तेरेबिनाजीनहींरहेहमकिसीतरहबसबितारहेहैं
  - Vishesh asthana
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