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Vishal Singh Tabish
tu bas mere saath nahin hai
tu bas mere saath nahin hai | तू बस मेरे साथ नहीं है
- Vishal Singh Tabish
तू
बस
मेरे
साथ
नहीं
है
वरना
कोई
बात
नहीं
है
इश्क़
की
ख़ुशबू
बाँटने
वालों
इश्क़
की
कोई
ज़ात
नहीं
है
वक़्त
नहीं
तो
वापस
कर
दो
दिल
मेरा
ख़ैरात
नहीं
है
तुम
से
हार
गए
हैं
वरना
दुनिया
की
औक़ात
नहीं
है
- Vishal Singh Tabish
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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जाँ
हम
दोनों
साथ
में
अच्छे
लगते
हैं
देखो
शे'र
मुकम्मल
अच्छा
लगता
है
Neeraj Neer
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है,
यह
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वा'दा
फ़रामोश
नहीं
है
कोई,
दिल
तलबग़ार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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वो
गले
बदहवा
से
लगते
हैं
उनको
हम
ग़म-शनास
लगते
हैं
इक
ज़माने
की
दूरियाँ
हैं
मगर
दूर
होकर
भी
पास
लगते
हैं
अब
उदासी
ये
हम
पे
जँचती
है
अब
तो
हँसते
उदास
लगते
हैं
हम
में
कमियाँ
तो
लाख
हैं
ताबिश
हम
उसे
फिर
भी
ख़ास
लगते
हैं
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Vishal Singh Tabish
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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मुझ
सेे
हर
शख़्स
रूठ
जाता
है
मेरा
होना
भी
मसअला
है
इक
Vishal Singh Tabish
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डर
है
घर
में
कैसे
बोला
जाएगा
छोड़ो
जो
भी
होगा
देखा
जाएगा
मैं
बस
उसका
चेहरा
पढ़कर
जाऊँगा
मेरा
पेपर
सब
सेे
अच्छा
जाएगा
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Vishal Singh Tabish
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