mar na jaa.e kahiin aziyyat se | मर न जाए कहीं अज़िय्यत से

  - Viru Panwar
मरजाएकहींअज़िय्यतसे
ज़िंदगीपेशमोहब्बतसे
अश्कआँखोंसेयूँँनिकलतेहैं
नदियाँनिकलीहैंजैसेपर्वतसे
आदमीसेनहींकोईमतलब
होतीहैशादीअबतोदौलतसे
ग़मभीभेजोकिशा'इरीमेंअब
कामचलतानहींहैवहशतसे
येनतीजाहैउसकोचाहनेका
मुझकोनफ़रतहैअबमोहब्बतसे
  - Viru Panwar
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