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Viru Panwar
koii KHaamosh hai mere andar
koii KHaamosh hai mere andar | कोई ख़ामोश है मेरे अंदर
- Viru Panwar
कोई
ख़ामोश
है
मेरे
अंदर
शोर
बेहोश
है
मेरे
अंदर
इसलिए
छोड़
कर
नहीं
जाता
दर्द
मदहोश
है
मेरे
अंदर
जब
से
इंकार
कर
गया
है
वो
इश्क़
बेहोश
है
मेरे
अंदर
- Viru Panwar
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सारे
रिश्ते
फ़ुज़ूल
जाते
हैं
भूलने
वाले
भूल
जाते
हैं
ये
ख़बर
आई
है
कि
उस
गली
में
तोहफ़े
में
अब
भी
फूल
जाते
हैैं
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उस
की
ख़ुश्बू
ने
भी
बिखरना
है
रंग
रंगों
का
भी
उतरना
है
जौन
का
काम
पूरा
करना
है
उसकी
ख़ुश्बू
में
रंग
भरना
है
धमकियाँ
ख़ुद-कुशी
की
दे
कर
के
ज़िंदगी
से
मज़ाक़
करना
है
हो
तो
सकता
नहीं
मगर
फिर
भी
वक़्त
अच्छा
घड़ी
में
भरना
है
मौत
का
कोई
ऐतिबार
नहीं
मुझ
को
तो
ख़ुद-कुशी
से
मरना
है
सामने
आ
कि
देख
कर
तुझ
को
आज
आईने
ने
सँवरना
है
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उस
से
बस
राब्ता
नहीं
मुमकिन
वरना
दुनिया
में
क्या
नहीं
मुमकिन
वही
अव्वल
है
आख़िरी
भी
वही
इश्क़
अब
दूसरा
नहीं
मुमकिन
उस
तरफ़
जाना
चाहता
हूँ
मैं
जिस
तरफ़
रास्ता
नहीं
मुमकिन
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दास्तान-ए-हयात
ख़त्म
हुई
उस
की
और
मेरी
बात
ख़त्म
हुई
उस
की
शादी
की
रात
ख़त्म
हुई
और
मेरी
काएनात
ख़त्म
हुई
दिल-ए-नाकाम
सो
नहीं
पाया
एक
मुद्दत
में
रात
ख़त्म
हुई
एक
अर्सा
लगा
था
कहने
में
एक
लम्हे
में
बात
ख़त्म
हुई
कर
गए
ख़ुद-कुशी
सभी
नाकाम
दर्द
की
वारदात
ख़त्म
हुई
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Viru Panwar
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आधा
दिल
है
और
आधा
रूमाल
तेरे
सीने
पे
रक्खा
रूमाल
जिस
ने
नम
की
आँख
मेरी
उस
को
मैंने
तोहफ़े
में
भेजा
रूमाल
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