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Viru Panwar
gham koii doosra pasand nahin
gham koii doosra pasand nahin | ग़म कोई दूसरा पसंद नहीं
- Viru Panwar
ग़म
कोई
दूसरा
पसंद
नहीं
कुछ
भी
तुझ
से
जुदा
पसंद
नहीं
तू
कि
समझे
न
समझे
पर
मुझ
को
कोई
तेरे
सिवा
पसंद
नहीं
की
नहीं
उस
ने
मुझ
से
बात
कभी
सो
मुझे
बोलना
पसंद
नहीं
वो
अगर
पूछता
तो
बतलाता
क्या
है
और
मुझ
को
क्या
पसंद
नहीं
इंतिहाई
पसंद
है
वो
मुझे
मैं
कि
जिस
को
ज़रा
पसंद
नहीं
साँस
जिस
में
न
ली
कभी
तुम
ने
मुझ
को
ऐसी
हवा
पसंद
नहीं
जो
नहीं
जाता
तेरे
घर
की
तरफ़
मुझ
को
वो
रास्ता
पसंद
नहीं
उस
ने
ठुकराया
तो
समझ
आया
क्यूँँ
हवा
को
दिया
पसंद
नहीं
उस
ने
बीमार
कर
के
छोड़
दिया
मुझ
को
तब
से
दवा
पसंद
नहीं
सुनने
वाले
पे
क्या
नहीं
गुज़री
तुम
ने
तो
कह
दिया
पसंद
नहीं
- Viru Panwar
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दिल
का
पौधा
हरा
नहीं
होता
उन
से
अब
सामना
नहीं
होता
सोचने
भर
की
दूरी
पे
है
वो
पर
मेरा
सोचा
हुआ
नहीं
होता
उस
तरफ़
होती
है
मेरी
मंज़िल
जिस
तरफ़
रास्ता
नहीं
होता
अपना
तो
ख़ैर
दिल
ही
टूटा
है
इश्क़
में
वरना
क्या
नहीं
होता
हैं
अधूरे
वो
सब
शजर
जिन
पर
एक
भी
घौंसला
नहीं
होता
सिर्फ़
दो
चार
हादसों
के
सिवा
दुनिया
में
कुछ
नया
नहीं
होता
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मेरा
साया
बिछड़
गया
मुझ
से
जब
कहा
उस
ने
अलविदा
मुझ
से
दो
ही
चीज़ों
से
इश्क़
है
उस
को
पहला
ख़ुद
से
व
दूसरा
मुझ
से
उसी
दिन
से
में
रहता
हूँ
बीमार
हुआ
जिस
रोज़
वो
जुदा
मुझ
से
यार
पिछले
बरस
वफ़ा
पे
शेर
सुनती
थी
एक
बे-वफ़ा
मुझ
से
अब
कहाँ
है
वो
साथ
वाला
शख़्स
पूछ
लेता
है
कैमरा
मुझ
से
मेरी
तारीकी
खा
गई
उस
को
रौशनी
का
था
सामना
मुझ
से
उस
के
क़दमों
के
माँगता
है
निशान
मेरी
मंज़िल
का
रास्ता
मुझ
से
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यूँँ
नहीं
बनती
शा'इरी
मुझ
में
हैं
बहुत
बातें
अन-कही
मुझ
में
कैसे
मैं
आ
गया
पसंद
उस
को
बात
ऐसी
तो
कुछ
न
थी
मुझ
में
मैं
रहा
ख़ुद
में
इतना
कम
मौजूद
हो
गई
अपनी
ही
कमी
मुझ
में
उस
के
जाते
ही
हो
गई
सुनसान
दिल
मोहल्ले
की
वो
गली
मुझ
में
साँस
लेने
की
ज़िंदा
रहने
की
कोई
करता
था
नौकरी
मुझ
में
हँसते
हँसते
भी
आँसू
आते
थे
यार
इतनी
उदासी
थी
मुझ
में
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अपना
भी
साथ
छोड़
सकता
हूँ
इस
क़दर
है
अज़ीज़
तन्हाई
जिस्म
मेरा
बना
उदासी
से
और
है
मेरी
क़मीज़
तन्हाई
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उसे
जिस
से
भी
शिद्दत
की
मोहब्बत
है
मुझे
उस
नाम
के
लड़कों
से
नफ़रत
है
धड़कता
है
मेरे
सीने
में
उस
का
ग़म
मुझे
ये
साँस
लेना
भी
अज़िय्यत
है
बहुत
ही
क़ीमती
है
यूँँ
तो
मेरा
वक़्त
मगर
तेरे
लिए
फ़ुर्सत
ही
फ़ुर्सत
है
बताया
मैंने
मेरे
शे'रों
में
जितना
वो
उस
से
भी
ज़ियादा
ख़ूब-सूरत
है
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