nazar ik saaya-e-abr-e-bala par jam gaii hai | नज़र इक साया-ए-अब्र-ए-बला पर जम गई है

  - Vipul Kumar
नज़रइकसाया-ए-अब्र-ए-बलापरजमगईहै
येकालिखदिलसेउतरीहैघटापरजमगईहै
मैंहरबुतकोहरारतकीकशिशबतलारहाहूँ
अजबइकबर्फ़मेरेदेवतापरजमगईहै
ज़रूरअगलीरुतेंअबरास्ताभटकेंगीइससेे
येजोकुछरेतमेरेनक़्श-ए-पापरजमगईहै
बदनपरनक़्शरहजातेहैंऔरदिलमेंनदामत
किसीलम्हेकीउजलतदस्त-ओ-पापरजमगईहै
हमारेसरतोआख़िरख़ाकहीहोनेथेइकदिन
येकैसीरौशनीतेग़-ए-जफ़ापरजमगईहै
छुपानाचाहताथामैंउसेशे'रोंमेंअपने
अबइकआलमकीआँखउसबे-वफ़ापरजमगईहै
हमारेपाँवमेंचक्करहैवोभीचाँदकाहै
सितारोंकीथकनउसकीरिदापरजमगईहै
  - Vipul Kumar
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