jism bhi aankh ke paani se haraa rehta tha | जिस्म भी आँख के पानी से हरा रहता था

  - Vipul Kumar
जिस्मभीआँखकेपानीसेहरारहताथा
सरभीक्यासरथाकिज़ानूपेपड़ारहताथा
आह-ओ-फ़रियादकेमौसमभीगुज़रतेथेमगर
ऐसीबस्तीहीनहींथीकिख़ुदारहताथा
उसकेबरतावसेसमझाकिमुक़द्दरमेंहैप्यास
नहरथाऔरसराबोंसेघिरारहताथा
शीशा-ए-शाम-ए-शिकस्तामेंशफ़क़फूटतीथी
रातभर‘अक्समेराख़ूँमेंसनारहताथा
आँखपरआँखपड़ीरहतीथीऔरफूलपेफूल
उसकेहमराह‘अजबबाग़सजारहताथा
आपहीआपउलझजातीथींबातेंअपनी
याकोईचोरकहींदिलमेंछुपारहताथा
मैंनेदरयाफ़्तकियाएकहीशख़्सऐसा'कुमार'
मैंगुज़रूँभीतोरस्तेमेंबिछारहताथा
  - Vipul Kumar
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