j | जितना सुलझाऊँ मैं उतनी ही उलझ जाती है

  - Vinod Kumar Tripathi Bashar
जितनासुलझाऊँमैंउतनीहीउलझजातीहै
ज़िंदगीकैसेमराहिलपेमुझेलातीहै
मुझकोजीनेकीहवसहैकभीमरनेकाजुनूँ
ज़िंदगीमेरीशब-ओ-रोज़फिसलजातीहै
ख़ूबरिश्ताहैकभीपासकभीदूरहैवो
ज़िंदगीअपनीहैपरग़ैरनज़रआतीहै
रास्तेबंदहैंमंज़िलहैरहबरकोई
ज़िंदगीभीतोउसीसम्तचलीजातीहै
ज़िंदगीतुझसेहैबसइतनीशिकायतमुझको
तूकिसीग़ैरमेंक्यूँँइतनासुकूँपातीहै
ज़िंदगीख़ूबहैइंसाफ़तिरीदुनियाका
दर्ददेतीहैमगरलबपेहँसीलातीहै
  - Vinod Kumar Tripathi Bashar
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