kisi ko paane kii mujhko khwaahish kisi ko khone ka dar kahaan hai | किसी को पाने की मुझको ख़्वाहिश किसी को खोने का डर कहाँ है

  - Vinamra Singh
किसीकोपानेकीमुझकोख़्वाहिशकिसीकोखोनेकाडरकहाँहै
सफ़रपेतन्हानिकलपड़ाहूँमेराकोईहमसेफ़रकहाँहै
मक़ामकैसायेगयाहैजोपेशक़दमीसेहमकोरोके
दिखाईदेअबकोईमन्ज़िलयेख़बररहगुज़रकहाँहै
हमऐसेलोगोंपेज़ुल्मकरनाहैवक़्तबर्बादकरनेजैसा
किहमजोज़ालिमसेपूछतेहैंतेरीजफ़ामेंअसरकहाँहै
ज़बानग़ैरोंकीबोलतेहैंयहाँतलकलोगइसजहाँको
पराईनज़रोंसेदेखतेहैंकिउनकीअपनीनज़रकहाँहै
मैंख़ुदकोपागलबतारहाहूँकिग़ौरकीजेगाआपइसपर
मुझेसमझनेकीसोचिएगासमझनामुमकिनमगरकहाँहै
हरएकलम्हेकोआख़िरीपलसमझकेजीनाहैहोशियारी
किसेपतासाथछोड़देकबकिज़िन्दगीमोतबरकहाँहै
लड़ेंगेहमज़िन्दगीसेअपनीकिजबतलकज़िन्दगीरहेगी
हज़ारतूफ़ानखड़ेहोंमगरपरिंदोंकोडरकहाँहै
  - Vinamra Singh
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