ye zulm hai mujh पर,ye rabbaani nahin | ये ज़ुल्म है मुझ पर,ये रब्बानी नहीं

  - Vaseem 'Haidar'
येज़ुल्महैमुझपर,येरब्बानीनहीं
जीनेमेंअबमुझकोतोआसानीनहीं
दावावोकरताहैमोहब्बतकाबहुत
येइश्क़उसकायारोरूहानीनहीं
पानीसेमुझकोजंगतोकरनीनहीं
पानीमेंमुझकोलाशतैरानीनहीं
सबशा'इरीअच्छीलिखेहोजौनतुम
याँशायरोंकीऐसीक़ुर्बानीनहीं
मेरीग़ज़लऐसेहीसुनलोयारोअब
मुझकोयहाँमेरीग़ज़लगानीनहीं
मेरीमोहब्बतपेभरोसातोकरो
मेरीनियतजानाँयेशैतानीनहीं
उसनेमोहब्बतकरकेतन्हाछोड़ाहै
फ़ितरतपेउसकीमुझकोहैरानीनहीं
  - Vaseem 'Haidar'
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