marham ke nahin hain ye taraf-daar namak ke | मरहम के नहीं हैं ये तरफ़-दार नमक के

  - Varun Anand
मरहमकेनहींहैंयेतरफ़-दारनमकके
निकलेहैंमिरेज़ख़्मतलबगारनमकके
आयाकोईसैलाबकहानीमेंअचानक
औरघुलगएपानीमेंवोकिरदारनमकके
दोनोंहीकिनारोंपेथीबीमारोंकीमज्लिस
इसपारथेमीठेकेतोउसपारनमकके
उसनेहीदिएज़ख़्मयेगर्दनपेहमारी
फिरउसनेहीपहनाएहमेंहारनमकके
कहतीथीग़ज़लमुझकोहैमरहमकीज़रूरत
औरदेतेरहेसबउसेअशआ'रनमकके
जिससम्तमिलाकरतीथींज़ख़्मोंकीदवाएँ
सुनतेहैंकिअबहैंवहाँबाज़ारनमकके
  - Varun Anand
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