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Varsha Gorchhia
kaanha
kaanha | "कान्हा"
- Varsha Gorchhia
"कान्हा"
आओ
न
किसी
दिन
यमुना
किनारे
कभी
किसी
बड़
या
पीपल
पर
चढ़ें
कोई
पीला
सा
आँचल
क्यूँँ
नहीं
देते
सौग़ात
में
मुझे
भी
दूर-दूर
चलें
चारागाहों
में
खेलें
मिल
कर
दोनों
मीठा
सा
राग
क्यूँँ
नहीं
सुनाते
मुझे
कभी
तो
सताओ
कभी
तो
मटकी
फोड़ो
चुरा
लो
मक्खन
कभी
तो
कान्हा
कहाँ
हो
तुम
आओ
न
रास-लीला
करो
कभी
मेरे
साथ
भी
- Varsha Gorchhia
तुम्हारे
साथ
चलने
पर
जो
दिल
राज़ी
नहीं
होता
बहुत
पहले
हम
अपना
फ़ैसला
तब्दील
कर
लेते
Saleem Kausar
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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जानता
हूँ
कि
तुझे
साथ
तो
रखते
हैं
कई
पूछना
था
कि
तेरा
ध्यान
भी
रखता
है
कोई?
Umair Najmi
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आप
के
बाद
हर
घड़ी
हम
ने
आप
के
साथ
ही
गुज़ारी
है
Gulzar
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दूर
रहें
तो
याद
बहुत
आती
सब
की
साथ
रहें
तो
घर
में
झगड़े
होते
हैं
Tanoj Dadhich
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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जता
दिया
कि
मोहब्बत
में
ग़म
भी
होते
हैं
दिया
गुलाब
तो
काँटे
भी
थे
गुलाब
के
साथ
Rehman Faris
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मशवरा
हम
भी
तो
दे
सकते
थे
पर
तेरा
साथ
दे
रहे
थे
हम
Vishal Singh Tabish
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