kaanha | "कान्हा"

  - Varsha Gorchhia
"कान्हा"
आओकिसीदिन
यमुनाकिनारे
कभीकिसीबड़
यापीपलपरचढ़ें
कोईपीलासाआँचल
क्यूँँनहींदेतेसौग़ातमें
मुझेभी
दूर-दूरचलेंचारागाहोंमें
खेलेंमिलकरदोनों
मीठासाराग
क्यूँँनहींसुनातेमुझे
कभीतोसताओ
कभीतोमटकीफोड़ो
चुरालोमक्खनकभीतो
कान्हाकहाँहोतुम
आओ
रास-लीलाकरो
कभीमेरेसाथभी
  - Varsha Gorchhia
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