apnon men Dhoondh na hi ab ke nazaare men Dhoondh | अपनों में ढूँढ़ न ही अब के नज़ारे में ढूँढ़

  - Haresh vanza
अपनोंमेंढूँढ़हीअबकेनज़ारेमेंढूँढ़
ढूँढ़नाहैतोमुझेअबतूख़सारेमेंढूँढ़
जबतलकथातोनहींजानसकामेरीक़द्र
अबकहींबैठकेरातोंकोसितारेमेंढूँढ़
नाज़थाजिसपेतुझेउसनेहीबख़्शेहैंयेज़ख़्म
तूभीबेचैनहोऔरमुझकोसहारेमेंढूँढ़
कोईफिरउससेजुड़ीयादबचालेतुझको
आजउसलड़केकोबे-सब्रपिटारेमेंढूँढ़
तुझकोलेडूबाहैतेरीहीज़ेहानतकाबोझ
होसकेतुझसेतोऔरऐबसहारेमेंढूँढ़
जबकिनारेसेमिलातोखुलादिलपेइकराज़
कहरहाथाकिसुकूँकोतूकिनारेमेंढूँढ़
कोईमुझकोभीअगरढूँढतादिखजाए'हरेश'
उसेकहनाकिउसेवक़्तकेमारेमेंढूँढ़
  - Haresh vanza
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy