koi zarra jo dil ki KHaak ka barbaad hota hai | कोई ज़र्रा जो दिल की ख़ाक का बर्बाद होता है

  - Vahshi Kanpuri
कोईज़र्राजोदिलकीख़ाककाबर्बादहोताहै
जहान-ए-इश्क़मेंशोर-ए-मुबारकबादहोताहै
पूछोक्यासुरूर-ए-लज़्ज़त-ए-बेदादहोताहै
जबआग़ोश-ए-मोहब्बतमेंदिल-ए-नाशादहोताहै
ख़ुदाजानेयेक्यादाम-ए-बलाहैगुलशन-ए-हस्ती
जिधरपरवाज़करताहूँउधरसय्यादहोताहै
येदर्स-ए-इश्क़भीकैसाअनोखादरसहैया-रब
किजितनाभूलताजाताहूँउतनायादहोताहै
जोतेरीयादमेंगिरताहैबनकरगौहर-ए-मक़्सद
वहीअश्क-ए-मोहब्बतहासिल-ए-रूदादहोताहै
कोईशोरीदा-सरपाबंद-ए-ज़िंदाँहोनहींसकता
बगूलाअपनीज़ंजीरोंमेंभीआज़ादहोताहै
जो'वहशी'कीतरहहोताहैपाबंद-ए-ग़म-ए-जानाँ
वहीतोबसग़म-ए-दौराँसेभीआज़ादहोताहै
  - Vahshi Kanpuri
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