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Uzma Syed
mausam koi sa bhi ho
mausam koi sa bhi ho | मौसम कोई सा भी हो
- Uzma Syed
मौसम
कोई
सा
भी
हो
बहुत
ज़र्द
दोपहरों
वाला
बहुत
काला
भीगे
अँधेरों
वाला
हवाएँ
जब
भी
चलती
हैं
यादों
की
गर्द
उड़ाती
हैं
लम्हे
उड़
कर
वक़्त
को
वापस
लाती
हैं
सनसनाती
आह
भरती
वीरानों
में
इधर
से
उधर
मंडलाती
हैं
यादें
गुनगुनाती
हैं
और
जब
बारिश
आती
हैं
दुख
भी
भीग
जाते
हैं
ज़ख़्म
ताज़ा
होते
हैं
भीगे
दुख
तकलीफ़
देते
हैं
ज़ख़्म
रिसते
रहते
हैं
हवाएँ
जब
भी
चलती
हैं
- Uzma Syed
मुझ
को
बीमार
करेगी
तिरी
आदत
इक
दिन
और
फिर
तुझ
से
भी
अच्छा
नहीं
हो
पाऊँगा
Rahul Jha
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
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इस
का
अपनी
ही
रवानी
पर
नहीं
है
इख़्तियार
ज़िंदगी
शिव
की
जटाओं
में
है
गंगा
की
तरह
Ayush Charagh
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शिकारी
से
बचने
में
कैसा
कमाल
निशाने
पे
रहना
बड़ी
बात
है
Shariq Kaifi
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बातें
करो
तो
बोलती
है
बोलते
हो
तुम
बहुत
उसने
किनारे
पे
से
लहरें
देखी
गहराई
नहीं
100rav
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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पहले
पानी
को
और
हवा
को
बचाओ
ये
बचा
लो
तो
फिर
ख़ुदा
को
बचाओ
Swapnil Tiwari
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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