kya qusoor ai arz-e-matlab hasrat-e-pur-josh ka | क्या क़ुसूर ऐ अर्ज़-ए-मतलब हसरत-ए-पुर-जोश का

  - Ummeed Amethvi
क्याक़ुसूरअर्ज़-ए-मतलबहसरत-ए-पुर-जोशका
चश्म-ए-हैराँकागिलाहैयालब-ए-ख़ामोशका
हैरत-आबाद-ए-तजल्लीमेंनहींउसदिलकाकाम
सदमा-पर्वर्दाहोजोमेहनत-सरा-ए-होशका
तेग़-ए-क़ातिलमैंतिरेक़ुर्बांबड़ाएहसाँकिया
जिस्मबारइकरूहकाथासरवबालइकदोशका
पा-ए-नाज़ुककोज़रादेरुख़्सत-ए-मश्क़-ए-ख़िराम
कबसेतकतीहैक़यामतमुँहतिरीपा-पोशका
हस्ती-ए-हुस्न-ओ-तग़ाफ़ुल-पेशगीकाहैगवाह
जाँ-ब-लबहोनातुम्हारेआशिक़-ए-मदहोशका
कमहोगाशोर-ए-नोशा-नोश-ए-सहबावाइ'ज़ो
दमसलामतचाहिएउम्मीद-ए-सहबा-नोशका
  - Ummeed Amethvi
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