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Umesh Maurya
pyaar jismoon ka khel hai ab to
pyaar jismoon ka khel hai ab to | प्यार जिस्मों का खेल है अब तो
- Umesh Maurya
प्यार
जिस्मों
का
खेल
है
अब
तो
जिस्म
जिसका
है
दिल
भी
उसका
है
- Umesh Maurya
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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ये
जानते
हैं
ठीक
नहीं
माँग
रहे
हैं
हम
एक
खंडहर
को
मकीं
माँग
रहे
हैं
सब
माँग
रहे
हैं
ख़ुदास
तेरा
जिस्म
और
हम
हैं,
कि
फ़क़त
तेरी
जबीं
माँग
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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बात
ही
कब
किसी
की
मानी
है
अपनी
हठ
पूरी
कर
के
छोड़ोगी
ये
कलाई
ये
जिस्म
और
ये
कमर
तुम
सुराही
ज़रूर
तोड़ोगी
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Jaun Elia
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सख़्त
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
रूह
मिरी
जिस्म-ए-यार
आ
कि
बेचारी
को
सहारा
मिल
जाए
Farhat Ehsaas
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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चिलचिलाती
धूप
है
और
पैर
में
चप्पल
नहीं
जिस्म
घाइल
है
मगर
ये
हौसला
घाइल
नहीं
Tanoj Dadhich
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ये
गहरा
राज़
है
इसका
बदन
को
खा
ही
जाती
है
मोहब्बत
पाक
होकर
भी
हवस
तक
आ
ही
जाती
है
ALI ZUHRI
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है
उस
बदन
की
लत
मुझे
सो
दूसरा
बदन
अच्छा
तो
लग
रहा
है
मेरे
काम
का
नहीं
Vishnu virat
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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मेरे
जिस्म
से
वक़्त
ने
कपड़े
नोच
लिए
मंज़र
मंज़र
ख़ुद
मेरी
पोशाक
हुआ
Azm Shakri
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मेरे
होंठों
के
बोसे
का
वो
टुकड़ा
तेरे
माथे
के
दिल
पर
छप
चुका
है
Umesh Maurya
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ख़ुद
को
भी
शर्म
आए
मुहब्बत
के
नाम
पर
थी
इस
क़दर
की
बेरुख़ी
सब
कुछ
बदल
गया
Umesh Maurya
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कब
मरूँगा
और
फुर्सत
देह
से
होगी
मुझे
थक
चुका
हूँ
मैं
तुम्हारी
याद
में
जी
कर
के
भी
Umesh Maurya
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मोहब्बत
का
सफ़र
ही
बस
अधूरा
रह
गया
अपना
बहुत
ही
जी
चुका
मरना
ही
बाकी
रह
गया
है
बस
Umesh Maurya
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दो
चार
दिन
में
ही
अगर
कपड़े
उतर
गए
रिश्ता
कोई
भी
हो
मग़र
ये
प्यार
तो
नहीं
Umesh Maurya
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