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Umesh Maurya
kaash ye mausam bhi thoda sard hota
kaash ye mausam bhi thoda sard hota | काश ये मौसम भी थोड़ा सर्द होता
- Umesh Maurya
काश
ये
मौसम
भी
थोड़ा
सर्द
होता
हिज्र
का
उनको
भी
थोड़ा
दर्द
होता
- Umesh Maurya
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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थकानें
पाँव
से
चल
कर
बदन
पर
फैल
जाती
हैं
मुसलसल
ख़्वाब
टूटे
हैं
यहाँ
पर
दिन
निकलने
में
Umesh Maurya
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इक
शख़्स
क्या
गया
जो
मेरे
दिल
की
बज़्म
से
जैसे
कि
इस
जहान
में
कोई
नहीं
रहा
Umesh Maurya
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कौन
मिलना
चाहता
है
मुफ़लिसों
से
कौन
बे
मतलब
के
ये
जोख़िम
उठाए
Umesh Maurya
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तुम
भी
अब
सच
ज़्यादा
ज़्यादा
बोल
रहे
हो
बच
के
रहना
जल्दी
ही
मारे
जाओगे
Umesh Maurya
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सियासत
हो
रही
है
धर्म
पर
ही
नहीं
तो
धर्म
का
ये
रूप
है
क्या
Umesh Maurya
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