jahaan bhar ki tamaam aañkhen nichod kar jitna nam banega | जहान भर की तमाम आँखें निचोड़ कर जितना नम बनेगा

  - Umair Najmi
जहानभरकीतमामआँखेंनिचोड़करजितनानमबनेगा
येकुलमिलाकरभीहिज्रकीरातमेरेगिर्येसेकमबनेगा
मैंदश्तहूँयेमुग़ालताहैशाइ'रानामुबालग़ाहै
मिरेबदनपरकहींक़दमरखकेदेखनक़्श-ए-क़दमबनेगा
हमारालाशाबहाओवर्नालहदमुक़द्दसमज़ारहोगी
येसुर्ख़कुर्ताजलाओवर्नाबग़ावतोंकाअलमबनेगा
तोक्यूँँहमपाँचसातदिनतकमज़ीदसोचेंबनानेसेक़ब्ल
मिरीछटीहिसबतारहीहैयेरिश्ताटूटेगाग़मबनेगा
मुझऐसेलोगोंकाटेढ़-पनक़ुदरतीहैसोए'तिराज़कैसा
शदीदनमख़ाकसेजोपैकरबनेगायेतयहैख़मबनेगा
सुनाहुआहैजहाँमेंबे-कारकुछनहींहैसोजीरहेहैं
बनाहुआहैयक़ींकिइसराएगानीसेकुछअहमबनेगा
किशाहज़ादेकीआदतेंदेखकरसभीइसपरमुत्तफ़िक़हैं
येजूँहीहाकिमबनामहलकावसीअ'रक़्बाहरमबनेगा
मैंएकतरतीबसेलगातारहाहूँअबतकसुकूतअपना
सदाकेवक़्फ़ेनिकालइसकोशुरूअ'सेसुनरिधमबनेगा
सफ़ेदरूमालजबकबूतरनहींबनातोवोशो'बदा-बाज़
पलटनेवालोंसेकहरहाथारुकोख़ुदाकीक़समबनेगा
  - Umair Najmi
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