ek se ek sharaarat sujhe ham ko subh-o-shaam | एक से एक शरारत सूझे हम को सुब्ह-ओ-शाम

  - Ujagar Warsi
एकसेएकशरारतसूझेहमकोसुब्ह-ओ-शाम
तोबोलोक्याहोगाअंजाम
खेलमेंअपनीजानपड़ीहोशोख़ीमेंहोनाम
तोबोलोक्याहोगाअंजाम
आपाकेबस्तेमेंहमचुपकेसेमिट्टीभरदें
अब्बाकीछतरीकोजोहमतोड़केचरमरकरदें
ऐसीबातेंहमघरमेंकरनेलगजाएँआम
तोबोलोक्याहोगाअंजाम
हमनेदिलमेंठानीहोकिसुनेंगेआजकहानी
फ़रमाइशरद्दकरदीजाएऔरसोजाएँनानी
मुर्ग़ीकापरकानमेंदेकेसोनाकरेंहराम
तोबोलोक्याहोगाअंजाम
जियोग्राफीकाटीचरजबआवेज़ाँकरदेनक़्शा
हमसेफिरयेपूछाजाएज़रादिखाओशिमला
जिसपरहमउँगलीकोरक्खेंलिक्खाहोआसाम
तोबोलोक्याहोगाअंजाम
ख़रबूज़ोंकेखेतकेअंदरघुसजाएँचुपकेसे
रखवालाभीताड़रहाहोपीछेसेपहुँचे
औरहमारीगर्दनअपनेहाथोंमेंलेथाम
तोबोलोक्याहोगाअंजाम
एकसेएकशरारतसूझेहमकोसुब्ह-ओ-शाम
तोबोलोक्याहोगाअंजाम
खेलमेंअपनीजानपड़ीहोशोख़ीमेंहोनाम
तोबोलोक्याहोगाअंजाम
  - Ujagar Warsi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy