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Saahir Ubaid Aleemi
kal jo the saath mere marne tak
kal jo the saath mere marne tak | कल जो थे साथ मेरे मरने तक
- Saahir Ubaid Aleemi
कल
जो
थे
साथ
मेरे
मरने
तक
आज
वो
सब
मेरे
ख़िलाफ़
आए
- Saahir Ubaid Aleemi
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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सात
टुकड़े
हुए
मेरे
दिल
के
एक
हफ़्ता
लगा
सँभलने
में
Tanoj Dadhich
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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कर
के
क़ुर्बान
अपनी
ख़ुशियों
को
ग़म
के
साए
में
यार
जीता
हूँ
मय-कदा
तो
नहीं
मगर
फिर
भी
तेरी
आँखों
का
जाम
पीता
हूँ
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Saahir Ubaid Aleemi
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बे
रंग
बे
अदा
है
हर
ज़िंदगी
खता
है
लेकिन
है
ये
करामत
सब
कुछ
हमें
पता
है
Saahir Ubaid Aleemi
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दम
भर
नहीं
रुके
तेरे
पहलु
में
हम
उबैद
ऐसा
सफ़र
चले
कि
मुसलसल
चले
गए
Saahir Ubaid Aleemi
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फैला
रही
है
नफ़रत
इस
दौर
की
हुकूमत
बच
कर
किधर
चलें
हम
किस
ओर
यार
बैठें
Saahir Ubaid Aleemi
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ग़म
के
हिस्से
में
होना
चाहती
है
ज़िंदगी
है
कि
रोना
चाहती
है
Saahir Ubaid Aleemi
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