zindagi kya kaha sudhar jaayen | ज़िन्दगी, क्या कहा, सुधर जाएँ

  - Rahul Singh Parihar
ज़िन्दगी,क्याकहा,सुधरजाएँ
ज़ातसेअपनीहमउतरजाएँ
कोईरखकरहमेंयूँँछोड़गया
पहलेधक्केमेंहीबिखरजाएँ
एकभीआँखभरनहींपाते
किससेयेसीखनेहुनरजाएँ
एकवा'दातोहमसेलेलोतुम
कुछतोहोजिससेेहममुक़रजाएँ
तुमपेजोइख़्तियारपालेंतो
ऐन-मुमकिनख़ुशीसेमरजाएँ
चाहतेथे,किकुछतोकहदोतुम
हमजिसेमानकरठहरजाएँ
आरज़ूख़त्मज़िस्मकीकरदी
इश्क़पूछेहैहमकिधरजाएँ?
आख़िरीकामतकख़राबकिया
जल्दबाज़ीमेंइसकिघरजाएँ
हमकिसीकामकेबचेहीनहीं
कुछबचाहीनहींजोकरजाएँ
  - Rahul Singh Parihar
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