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Toyesh prakash
haay na jaane kaisi uljhan
haay na jaane kaisi uljhan | हाए न जाने कैसी उलझन
- Toyesh prakash
हाए
न
जाने
कैसी
उलझन
नाग
हज़ारों
एक
है
चंदन
- Toyesh prakash
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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बड़ी
जल्दी
में
था
उस
दिन
ज़रा
बेचैन
भी
था
वो
उसे
कहना
था
कुछ
मुझ
सेे
मगर
वो
कह
नहीं
पाया
Varun Anand
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उसको
नंबर
देके
मेरी
और
उलझन
बढ़
गई
फोन
की
घंटी
बजी
और
दिल
की
धड़कन
बढ़
गई
Ana Qasmi
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मेरे
महबूब
मत
बेचैन
होना
तेरे
क़ासिद
ने
ख़त
पहुँचा
दिया
है
Shajar Abbas
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कोई
मेरे
दिल
से
पूछे
तिरे
तीर-ए-नीम-कश
को
ये
ख़लिश
कहाँ
से
होती
जो
जिगर
के
पार
होता
Mirza Ghalib
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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किसी
की
तपिश
में
ख़ुशी
है
किसी
की
किसी
की
ख़लिश
में
मज़ा
है
किसी
का
Unknown
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अब
शहर
की
थकावट
बेचैन
कर
रही
है
अब
शाम
हो
गई
है
चल
माँ
से
बात
कर
लें
Akash Rajpoot
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और
तो
कुछ
कहानी
नहीं
बस
यही
वो
हमारी
नहीं
वो
ख़ुशी
कुछ
ख़ुशी
ही
नहीं
जिस
ख़ुशी
में,
तुम्हारी
नहीं
बह
गई
आँख
से
आग
ये
यूँँ
न
छेड़ो
ये
पानी
नहीं
ज़िंदगी
है
ख़ुशी
और
ग़म
ग़म
बिना
तो
ख़ुशी
ही
नहीं
पूछ
लूँ
जब
उसे,
क्या
किया?
तो
कहे
कुछ
नहीं
भी
नहीं
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Toyesh prakash
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आप
को
ये
जान
जाना
चाहिए
आप
जो
हों
फिर
हमें
क्या
चाहिए
मुश्किलों
को
आज़माना
चाहिए
ग़म
में
भी
तो
मुस्कुराना
चाहिए
आपके
दिल
में
गुज़ारा
चाहिए
मेरे
दिल
को
ये
ठिकाना
चाहिए
फ़ासला
जब
भी
मिटाना
चाहिए
हर
ख़ता
को
भूल
जाना
चाहिए
उनको
अक्सर
यूँँ
मनाना
चाहिए
उन
सेे
ही
ख़ुद
रूठ
जाना
चाहिए
ज़िंदगी
जीना
बड़ा
आसान
हो
चाहिए
बस
इक
बहाना
चाहिए
बात
फिर
से
हो
सकेगी
पर
यूँँ
तो
चाहिए
इस
में
ज़माना
चाहिए
बात
बिगड़ी
प्यार
के
इज़हार
से
प्यार
जिस
सेे
हो
छुपाना
चाहिए
हर
ख़ुशी
के
साथ
ग़म
भी
है
जुड़ा
ग़म
में
सब
को
ये
सुझाना
चाहिए
बाल
खोले
वो
चले
तो
ये
लगे
अब
हवा
को
भी
तो
आना
चाहिए
जिस
ज़मीं
पे
वो
चले
उसको
सदा
फिर
फ़लक
कहके
बुलाना
चाहिए
आप
क्या
ये
भी
बताएँगे
हमें
आइने
को
क्या
दिखाना
चाहिए
क्या
बताएँ
शाम
का
क्या
रंग
है
रंग
उसका
रंग-लाना
चाहिए
फ़न
हमारा
तो
यही
है
और
बस
यूँँ
रुलाकर
फिर
हँसाना
चाहिए
पूछिए
हम
से
कभी
तो
पूछिए
आपको
तोयेश!
अब
क्या
चाहिए
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Toyesh prakash
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इक
ज़रूरी
ही
काम
करते
हैं
हम
तुम्हें
जब
सलाम
करते
हैं
जब
कभी
शा'इरी
की
है
हमने
हर
तरफ़
तेरा
नाम
करते
हैं
याद
करते
हैं
शे'र
कहते
हैं
रात
कितनी
हराम
करते
हैं
जो
कभी
दे
सके
नहीं
उत्तर
हर
दफ़ा
राम
राम
करते
हैं
वो
नहीं
देखते
ख़ुदी
का
घर
बात
उसकी
तमाम
करते
हैं
काश
तोयेश
जानता
ख़ुद
को
लोग
तो
काम
धाम
करते
हैं
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Toyesh prakash
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उनकी
आँखें
झील
नहीं
हैं
आकाश
इन्हें
बत
लाएँगे
डूबने
वाले
डूब
न
पाए
उड़ने
वाले
उड़
जाएँगे
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Toyesh prakash
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वो
तो
ऐसे
टहल
रही
होगी
इक
नदी
जैसे
चल
रही
होगी
यूँँ
लगेगा
कि
आ
गया
मैं
घर
फिर
वो
आँखें
भी
मल
रही
होगी
इक
दफ़ा
देखलूँ
उसे
यकसाँ
एक
ख़्वाहिश
ये
पल
रही
होगी
आग
से
तो
बची
रही
होगी
आँसुओं
से
वो
जल
रही
होगी
दिल
ये
तोयेश
बोलता
है
बस
ये
कमी
उसकी
खल
रही
होगी
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Toyesh prakash
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