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Salma Malik
dil ke makaan ka ik makeen hai tu
dil ke makaan ka ik makeen hai tu | दिल के मकाँ का इक मकीं है तू
- Salma Malik
दिल
के
मकाँ
का
इक
मकीं
है
तू
तू
ढूँढ़
मुझको
गर
यहीं
है
तू
तू
लाज़मी
मुझको
मगर
तेरा
मैं
हूँ
भरम
मेरा
यक़ीं
है
तू
- Salma Malik
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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ज़िन्दगी
इक
हादसा
है
बेहया
ये
बे-वफ़ा
है
मर
चुकी
इंसानियत
है
कौन
किसका
अब
सगा
है
क्या
करोगे
पूछकर
के
फ़र्क़
किस
पर
कब
पड़ा
है
लोग
चलते
राह
अपनी
हादसा
हर
दिन
नया
है
अब
किसी
की
अहमियत
क्या
सिर्फ़
पैसा
ही
बड़ा
है
जो
चला
है
सम्त
अपनी
वो
अकेला
ही
चला
है
महज़
'सलमा'
ही
नहीं
है
हर
बशर
तन्हा
खड़ा
है
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Salma Malik
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यही
वो
वक़्त
है
जो
आज
हम
बर्बाद
करते
हैं
यही
वो
वक़्त
है
जो
लौटकर
वापस
नहीं
आता
Salma Malik
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ये
रिश्ते
नाते
सब
इक
उलझन
है
इन
रिश्तों
में
हर
पल
इक
अनबन
है
वो
जो
हँसता
दिखता
है
ना
तुमको
देखो
तो
उसका
रोता
तन-मन
है
अम्मी
की
गोदी
पापा
के
शाने
जाने
क्यूँ
खोया
हमने
बचपन
है
कश्ती
का
मौसम
अच्छा
था
लेकिन
अब
तो
सूखा
सूखा
हर
आँगन
है
पहले
तपना
जलना
भी
पड़ता
है
तब
जाकर
बनता
कोई
कुंदन
है
चुप
क्यूँ
हो
तुम
कुछ
बोलो
ना
'सलमा'
उजड़ा
उजड़ा
कैसा
हर
गुलशन
है
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Salma Malik
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बहुत
अच्छी
नहीं
होती
उदासी
हर
घड़ी
की
ग़मों
से
चूर
हो
जाओ
तो
रो
कर
देख
लेना
Salma Malik
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हो
भले
ग़म
मुस्कुराना
चाहिए
आँख
का
मोती
छिपाना
चाहिए
ये
नहीं
ख़्वाहिश
घरौंदा
ख़ूब
हो
बेघरों
को
बस
ठिकाना
चाहिए
वक़्त
पर
जब
साथ
अपने
छोड़
दें
ग़ैर
को
तब
आज़माना
चाहिए
हौसला
गर
टूट
जाए
साथियों
साथ
ख़ुद
का
फिर
निभाना
चाहिए
दोस्ती
में
बदगुमानी
जो
करे
हाथ
उस
सेे
फिर
छुड़ाना
चाहिए
वक़्त
सा
अनमोल
कुछ
होता
नहीं
यूँँ
नहीं
इसको
गँवाना
चाहिए
हैं
किताबों
में
छिपे
मोती
कई
कातिबों
को
ये
बताना
चाहिए
ये
नहीं
आसान
है
'सलमा'
मगर
क़र्ज़
लिखने
का
चुकाना
चाहिए
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Salma Malik
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