kaha jab na jaa.e likho diary tum | कहा जब न जाए लिखो डायरी तुम

  - Salma Malik
कहाजबजाएलिखोडायरीतुम
सहाजबजाएकरोनग़्मगीतुम
चढ़ेख़ब्तजोयेग़ज़लकाकभीभी
लिखोशे'रऐसाकरोआशिक़ीतुम
नहींज़िन्दगीयेदुबारामिलेगी
मिलीहैतुम्हेंतोजियोज़िन्दगीतुम
नईबिल्डिंगेहैंतुम्हारीयेमाना
मगरक्यूँजलातेहोयेझोपड़ीतुम
नहींअबलगाओयूँँचेहरेपेचेहरे
भलाओढ़तेहोयेक्यूँँचेहरगीतुम
वहीइकख़ुदाहैज़मीआसमाँपर
मिरीबातमानोकरोबन्दगीतुम
करोइल्महासिलकिताबोंसे'सलमा'
मिटादोमशालोंसेयेतीरगीतुम
  - Salma Malik
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy