khu | ख़ुदी को ख़ुद से हरा कर ये लड़खड़ाते हैं,

  - Haider Khan
ख़ुदीकोख़ुदसेहराकरयेलड़खड़ातेहैं,
अजीबलोगहैंमंज़िलसेलौटआतेहैं।
तुम्हारेइश्क़केबारेमेंसबबतातेहैं
मुझेहीलोगमेरीदास्ताँसुनातेहैं
ख़िलाफ़जोभीहमारेहैउससेकहदेना
चराग़हमभीहवाओंमेंहीजलातेहैं
सजाकेचहरेपेमुस्कानदिलमेंरखकरग़म
ख़ुशीकेगीतज़मानेकोहमसुनातेहैं
सुनाहैक़द्रवोकरतानहींतुम्हारीअब
सुनाहैलोगजोबोतेहैंवोहीपातेहैं
किसीनेअहद-ए-वफ़ातर्ककरदियातोक्या
कुछऐसेलोगभीहैंजोइसेनिभातेहैं
फ़क़तख़ुशीहीमनाकरकेहमनहींरुकते
हमअहल-ए-हर्फ़हैंहमदर्दभीमनातेहैं
अभीभीअपनीकिताबोंकेपिछलेपन्नेपर
तुम्हारेनामकोलिखतेहैंफिरमिटातेहैं
  - Haider Khan
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