dil kii sunkar dil ke hi saanche men dhalt hai kaaghaz | दिल की सुनकर दिल के ही साँचे में ढलता है काग़ज़

  - Ananth Faani
दिलकीसुनकरदिलकेहीसाँचेमेंढलताहैकाग़ज़
जबभीउतारूँउसपेकोईशे'रमचलताहैकाग़ज़
एकग़ज़लमेंज़िक्रतेराइसकारणहीकमकरताहूँ
एकजगहपड़जाएसारीधूपतोजलताहैकाग़ज़
कहाँसेपढ़ताहैग़ज़लेंअपनीवोशायरक्यामालूम
हमजबजाँचकरेंहरबारहीख़ालीनिकलताहैकाग़ज़
उससेेबहसतभीकरनाजबहोंमज़बूतदलीलेंसब
उसकीकचहरीमेंपक्काहोतोहीचलताहैकाग़ज़
मेरीरायमेंइतनीमयख़्वारीभीठीकनहींफ़ानी
गीलाहोजाएजोज़ियादातोफिरगलताहैकाग़ज़
  - Ananth Faani
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