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ABhishek Parashar
jo zaroorat phir padi us ko hamaari
jo zaroorat phir padi us ko hamaari | जो ज़रूरत फिर पड़ी उस को हमारी
- ABhishek Parashar
जो
ज़रूरत
फिर
पड़ी
उस
को
हमारी
फिर
कहा
उस
ने
हमीं
को
जान
अपनी
- ABhishek Parashar
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मैं
होश-मंद
हूँ
ख़ुद
भी
सो
मेरी
ग़ज़लों
में
न
रक़्स
करता
है
'आशिक़
न
बाल
खींचता
है
Charagh Sharma
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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जान
लेना
कि
नया
हाथ
बुलाता
है
तुम्हें
गर
कोई
हाथ
छुड़ाए
तो
छुड़ाने
देना
Ameer Imam
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मैंने
अपनी
ग़ज़लें
खारिज
कर
डाली
सोचो
मेरी
जान
तुम्हारा
क्या
होगा
Talib Toofani
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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क़ल्ब-ए-हज़ी
मता-ए-जाँ
यूँँ
शाद
कीजिए
कसरत
के
साथ
आप
हमें
याद
कीजिए
दौलत
में
चाहते
हो
इज़ाफा
अगर
शजर
तो
बेकसों
यतीमों
की
इमदाद
कीजिए
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Shajar Abbas
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सुनो
हर-वक़्त
इतना
याद
भी
मत
कीजिए
हमको
कहीं
ऐसा
न
हो
की
हिचकियों
में
जाँ
निकल
जाए
Sandeep dabral 'sendy'
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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मुझ
ऐसे
आशिकों
का
वो
ख़ुदा
है
वो
जो
कुछ
कहता
है
सब
फ़लसफा
है
ABhishek Parashar
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मेरा
महबूब
सच
में
बे-वफ़ा
है
या
उसको
मुझ
सेे
कोई
मसअला
है
ज़रा
सी
बात
पे
छोड़ा
था
मुझको
भला
ऐसे
भी
कोई
छोड़ता
है
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ABhishek Parashar
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दुखों
को
बेच
कर
मैं
सुख
ले
आया
हूँ
बहुत
दिन
बाद
खुल
कर
मुस्कुराया
हूँ
न
पूछे
अब
कोई
बारे
में
उसके
दोस्त
बड़ी
मुश्किल
से
उसको
भूल
पाया
हूँ
परिंदा
हूँ
मुझे
उड़ने
दिया
जाए
मैं
पिंजरा
तोड़
कर
के
भाग
आया
हूँ
रिहा
होने
से
पहले
मरने
से
पहले
मुझे
तो
पूछ
कितना
फड़फड़ाया
हूँ
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ABhishek Parashar
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मेरी
क़िस्मत
में
लिखा
होता
है
हद
से
ज़्यादा
जो
बुरा
होता
है
अपने
दुखड़े
मैं
सुनाऊँ
किसको
सब
का
दुख
मुझ
सेे
बड़ा
होता
है
बे-क़ुसूरो
को
सज़ा
मिलती
है
कैसे
मानूँ
कि
ख़ुदा
होता
है
बच्चियों
को
भी
नहीं
छोड़ते
हैं
आदमी
कितना
गिरा
होता
है
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ABhishek Parashar
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बड़ी
अज़ीब
तमन्ना
है
मेरे
दिल
की
दोस्त
मुझे
हर
एक
नज़र
में
ख़राब
होना
है
ABhishek Parashar
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