khabar jhoo | ख़बर झूठी थी और अख़बार जाली थे

  - ABhishek Parashar
ख़बरझूठीथीऔरअख़बारजालीथे
कहानीकेसभीकिरदारजालीथे
सर-ए-बाज़ारनफ़रतबिकरहीथीऔर
मोहब्बतसेभरेबाज़ारजालीथे
मैंकैसेदुश्मनोंकासामनाकरता
दिएजोदोस्तनेऔज़ारजालीथे
यक़ींहोतानहींइसबातपरलेकिन
यक़ींकरदोस्तमेरेयारजालीथे
मैंअबजोकहताहूँसचकहताहूँयारो
मिरेपहलेकेसबअश'आरजालीथे
सभीमरकरसमझजाएँगेइकदिनये
मोहब्बतदोस्तीघर-बारजालीथे
  - ABhishek Parashar
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