gham mujhe apna bhula kar dekhna hai | ग़म मुझे अपना भुला कर देखना है

  - ABhishek Parashar
ग़ममुझेअपनाभुलाकरदेखनाहै
ज़िंदगीकोमुस्कुराकरदेखनाहै
रहलियातन्हाबहुतमैंअबकिसीके
दिलमेंअपनाघरबनाकरदेखनाहै
वोपुरानासालथायेतोनयाहै
अबतोथोड़ीसीवफ़ाकरदेखनाहै
सबरक़ीबोंसेमुझेमिलवाकिसीदिन
मुझकोअपनादिलजलाकरदेखनाहै
वस्लतोमुमकिननहींयारोमुझेअब
हिज्रमेंख़ुदकोमिटाकरदेखनाहै
यादआनाछोड़दोगरतुममुझेतो
फिरकिसीसेदिललगाकरदेखनाहै
  - ABhishek Parashar
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