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RAAHI
main bura hi sahi par sahi to raha
main bura hi sahi par sahi to raha | मैं बुरा ही सही पर सही तो रहा
- RAAHI
मैं
बुरा
ही
सही
पर
सही
तो
रहा
तुम
सही
होते
होते
ग़लत
हो
गए
- RAAHI
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ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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बोसा
जो
रुख़
का
देते
नहीं
लब
का
दीजिए
ये
है
मसल
कि
फूल
नहीं
पंखुड़ी
सही
Sheikh Ibrahim Zauq
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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अगर
सच
इतना
ज़ालिम
है
तो
हम
से
झूट
ही
बोलो
हमें
आता
है
पतझड़
के
दिनों
गुल-बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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अब
ये
भी
नहीं
ठीक
कि
हर
दर्द
मिटा
दें
कुछ
दर्द
कलेजे
से
लगाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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क्या
ग़लत-फ़हमी
में
रह
जाने
का
सदमा
कुछ
नहीं
वो
मुझे
समझा
तो
सकता
था
कि
ऐसा
कुछ
नहीं
इश्क़
से
बच
कर
भी
बंदा
कुछ
नहीं
होता
मगर
ये
भी
सच
है
इश्क़
में
बंदे
का
बचता
कुछ
नहीं
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Tehzeeb Hafi
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तुम
मिरे
साथ
हो
ये
सच
तो
नहीं
है
लेकिन
मैं
अगर
झूट
न
बोलूँ
तो
अकेला
हो
जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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जाम,
सिगरेट,
शे'र,
तुम,
महफ़िल
और
क्या
क्या
नशे
में
है
'राही'
RAAHI
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इक
ही
कश्ती
के
दो
सवारी
है
ज़िंदगी
की
बहुत
उधारी
है
बोलने
दो
ज़माने
को
कुछ
भी
वो
हमारी
है,
तो
हमारी
है
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RAAHI
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उम्र
गुज़रेगी
अब
तीरगी
में
काफ़ी
बेचैनी
है
रौशनी
में
साल
ये
भी
अकेले
बिताया
वो
नहीं
आई
दीपावली
में
ख़त्म
कर
इश्क़-ओ-रब्त-ओ-त'अल्लुक़
याद
ही
बस
बची
ज़िंदगी
में
इश्क़
ख़ातिर
कमाना
पड़ेगा
क्या
रखा
है
यहाँ
शा'इरी
में
दोस्त
तक
याद
नइँ
करते
अब
तो
कौन
ही
साथ
दे
मुफ़्लिसी
में
ज़िंदगी
भर
कमाई
जो
इज़्ज़त
खो
दी
है
महज़
इक
दिल-लगी
में
तजरबा
कह
रहा
सबको
'राही'
मत
यक़ीं
कीजिए
आशिक़ी
में
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RAAHI
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गिना
हर
साँस
को
हमने
तुम्हारी
याद
में
हमने
बिना
तेरे
न
दिल
में
फिर
मुहब्बत
घर
कभी
होगी
RAAHI
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जब
कभी
हो
वो
सफ़र
में
वक़्त
कटता
तक
नहीं
है
RAAHI
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