mujh ko gale laga ke hui zindagi KHamosh | मुझ को गले लगा के हुई ज़िंदगी ख़मोश

  - Tahir Hanfi
मुझकोगलेलगाकेहुईज़िंदगीख़मोश
चुपकेसेयूँँहयातमिरीचलबसीख़मोश
क़िस्सेविसालकेतोकिताबोंमेंरहगए
पत्तोंपेहिज्रकीथीकहानीवहीख़मोश
सह
मेंहुएशजरकीभीसज्दाकुशाईथी
सज्दा-कुनाँकोदेखकेमिट्टीहुईख़मोश
हाँहाँअरेवहीवहीहैमौतजिसकानाम
लेनेकोमुझकोदोस्तमिरीगईख़मोश
'ताहिर'कीपारसाईकादा'वानहींमुझे
दीवार-ओ-दरपेबेलकीनेकीउगीख़मोश
  - Tahir Hanfi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy