mit ga.e haaye makeen aur makaan-e-dehlina raha naam ko bhi naam-o-nishaan-e-dehli | मिट गए हाए मकीं और मकान-ए-देहली

  - Tafazzul Husain Khan Kaukab Dehlavi
मिटगएहाएमकींऔरमकान-ए-देहली
रहानामकोभीनाम-ओ-निशान-ए-देहली
सह
मेंसह
मेंरहेंक्यूँँकिमुक़ीमान-ए-फ़लक
किफ़लकहैहदफ़-ए-तीर-ए-फ़ुग़ान-ए-देहली
हमतोइंसानहैंजीक्यूँँकिरहेबिनरोए
किफ़रिश्तेभीहुएमर्सिया-ख़्वान-ए-देहली
जैसेफ़ारसमेंख़ुलासाहैज़बान-ए-शीराज़
वैसीहीहिन्दमेंहैपाकज़बान-ए-देहली
दूरसेदेखकेहोक्यूँँकियक़ींदिल्लीका
केदिल्लीमेंहोजबयूँँहीगुमान-ए-देहली
फ़र्त-ए-काहीदगी-ए-दर्दसेयारबअबतो
सबकेसबहोगएहैंपीरजवान-ए-देहली
इसकीवीरानीमेंइकबातहैदेखोअबतक
मिटगएपरभीतोबाक़ीरहीआन-ए-देहली
जसद-ए-चर्ख़अंजुमसेबनेआबला-वार
गरहोदरपयबर्बादी-ए-शान-ए-देहली
बस-किहंगामा-तलबथायेवहाँपहलेसे
फ़ित्ना-ए-हश्रभीहोवेगामियान-ए-देहली
जोमकींरहगएबे-गोर-ओ-कफ़नमरमरकर
ढाँपनेपरवोगिरेउनकामकान-ए-देहली
'ग़ालिब'-ओ-'साक़िब'-ओ-'सालिक'हीनहींहैंग़मगीं
'कौकब'-ए-ख़स्ताभीकरताहैफ़ुग़ान-ए-देहली
  - Tafazzul Husain Khan Kaukab Dehlavi
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