ye hijraton ka zamaana bhi kya zamaana hai | ये हिजरतों का ज़माना भी क्या ज़माना है

  - Syed Sarosh Asif
येहिजरतोंकाज़मानाभीक्याज़मानाहै
उन्हींसेदूरहैंजिनकेलिएकमानाहै
ख़ुशीयेहैकिमिरेघरसेफ़ोनआयाहै
सितमयेहैकिमुझेख़ैरियतबतानाहै
हमेंयेबातबहुतदेरमेंसमझआई
वहींतोजालबिछाहैजहाँभीदानाहै
हमेंजलानहींसकतीहैधूपहिजरतकी
हमारेसरपेज़रूरतकाशामियानाहै
नमाज़ईदकीपढ़करमैंढूँढताहीरहा
कहींदिखेकोईअपनागलेलगानाहै
वहींवहींलिएफिरतीहैगर्दिश-ए-दौराँ
जहाँजहाँभीलिखामेराआब-ओ-दानाहै
  - Syed Sarosh Asif
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