ye kaj-adaai ye ghamza tira kabhi phir yaar | ये कज-अदाई ये ग़म्ज़ा तिरा कभी फिर यार!

  - Syed Kashif Raza
येकज-अदाईयेग़म्ज़ातिराकभीफिरयार!
कितेराशहरनयाऔरमैंमुसाफ़िरयार!
तूऔरकुछसही,दोस्ततोहैआख़िरयार!
दुखीरहाहैबहुतआजतेराशाइ'रयार!
कहाँकालम्स,कहाँकीहवस,कहाँकाविसाल
तड़परहाहूँतिरीहमदमीकीख़ातिरयार!
सँभलभीजाताथादिलतेरेहिज्रमें,या'नी
रहाहूँमैंभीतिरीआरज़ूकामुंकिरयार!
पुकारतीहैंमुझेघंटियाँतिरीऐसे
किजैसातेरामदीनाहोकोईमंदिरयार!
  - Syed Kashif Raza
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