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Surbhi Sharma
teri nazdeekiyaan mausami hi raheensubah barsaat to raat sookha pada
teri nazdeekiyaan mausami hi raheensubah barsaat to raat sookha pada | तेरी नज़दीकियाँ मौसमी ही रहीं
- Surbhi Sharma
तेरी
नज़दीकियाँ
मौसमी
ही
रहीं
सुब्ह
बरसात
तो
रात
सूखा
पड़ा
- Surbhi Sharma
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अब
तो
इस
राह
से
वो
शख़्स
गुज़रता
भी
नहीं
अब
किस
उम्मीद
पे
दरवाज़े
से
झांके
कोई
Parveen Shakir
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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हम
हैं
रहे-उम्मीद
से
बिल्कुल
परे
परे
अब
इंतज़ार
आपका
कोई
करे!
करे!
मैंने
तो
यूँँ
ही
अपनी
तबीयत
सुनाई
थी
तुम
तो
लगीं
सफाइयाँ
देने,
अरे!
अरे!
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Balmohan Pandey
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हर
इक
मकाँ
में
जला
फिर
दिया
दिवाली
का
हर
इक
तरफ़
को
उजाला
हुआ
दिवाली
का
Nazeer Akbarabadi
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जिसकी
फ़ितरत
ही
बे
वफ़ाई
हो
उस
सेे
उम्मीद-ए-वफ़ा
क्या
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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सर्द
रात
है
हवा
भी
सोच
मत
पहन
मुझे
सुब्ह
देख
लेंगे
किस
कलर
की
शाल
लेनी
है
Neeraj Neer
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जनम
दिन
पर
घड़ी
दी
थी
उन्होंने
हमें
उम्मीद
थी
वो
वक़्त
देंगे
Harsh saxena
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न
जाने
किस
लिए
उम्मीद-वार
बैठा
हूँ
इक
ऐसी
राह
पे
जो
तेरी
रहगुज़र
भी
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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तेरे
वादे
से
प्यार
है
लेकिन
अपनी
उम्मीद
से
नफ़रत
है
पहली
ग़लती
तो
इश्क़
करना
थी
शा'इरी
दूसरी
हिमाक़त
है
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Mehshar Afridi
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झिझकता
हूँ
उसे
इल्ज़ाम
देते
कोई
उम्मीद
अब
भी
रोकती
है
Shariq Kaifi
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लिखो
कुछ
आप
यूँँ
अल्फ़ाज़
अब
ता'रीफ़
में
मेरी
ग़ज़ल
ये
आप
के
ही
इश्क़
में
मैंने
सुनाई
है
Surbhi Sharma
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अभी
तो
आए
हो
फिर
क्यूँँ
चले
जाना
है
दोबारा
चलो
तो
फिर
दिल-ए-हसरत
में
दिन
से
शाम
करते
हैं
Surbhi Sharma
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तसुव्वर
में
ही
क्यूँँ
समाए
हो
तुम
अब
तभी
तो
मोहब्बत
में
वीरानियाँ
हैं
Surbhi Sharma
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क़लम
से
ही
मुहब्बत
की
है
कातिब
ने
ये
उल्फ़त
मुझ
से
की
जाए
तो
अच्छा
है
Surbhi Sharma
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देखो
इज़्ज़त
यहाँ
हुलिए
से
ही
मिलती
है
तो
फिर
भिखारी
को
यूँँ
मौक़ा
न
दिया
जा
सकता
Surbhi Sharma
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