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Sohil Barelvi
ye samundar bhi khaali kar dooñga
ye samundar bhi khaali kar dooñga | ये समुंदर भी ख़ाली कर दूँगा
- Sohil Barelvi
ये
समुंदर
भी
ख़ाली
कर
दूँगा
एक
क़तरा
तो
पी
लिया
मैं
ने
- Sohil Barelvi
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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वो
इतना
शांत
दरिया
था
मगर
जब
गया
तो
ले
गया
सब
कुछ
बहा
के
Siddharth Saaz
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अब
तो
दरिया
सूख
चुका
है
अब
तो
इस
शम्मा
को
बुझा
दो
Siddharth Saaz
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दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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कोई
समुन्दर,
कोई
नदी
होती,
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता?
Tehzeeb Hafi
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हैरत
से
जो
यूँँ
मेरी
तरफ़
देख
रहे
हो
लगता
है
कभी
तुम
ने
समुंदर
नहीं
देखा
Aanis Moin
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तूफ़ानों
से
आँख
मिलाओ
सैलाबों
पे
वार
करो
मल्लाहों
का
चक्कर
छोड़ो
तैर
के
दरिया
पार
करो
Rahat Indori
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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कोई
कितनी
भी
फ़िक्र
कर
ले
यहाँ
अपना
सब
को
ख़याल
रहता
है
Sohil Barelvi
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जहाँ
तू
है
वहाँ
पर
हर
ख़ुशी
है
मिरी
जाँ
तू
बहार-ए-ज़िंदगी
है
न
जाने
क्यूँँ
मुझे
भी
लग
रहा
है
मोहब्बत
से
बड़ी
शय
दोस्ती
है
बरस
कर
ख़ुश्क
तू
तो
हो
चुका
है
मिरे
लब
पर
अभी
तक
तिश्नगी
है
तिरी
तस्वीर
को
मैं
देखता
हूँ
तिरी
तस्वीर
मुझ
को
देखती
है
अभी
हाथों
को
मेरे
छोड़ना
मत
ज़रा
सी
देर
की
बस
तीरगी
है
मोहब्बत
आप
की
दे
कर
ख़ुदा
ने
कमी
पैदाइशी
पूरी
करी
है
हमारे
ज़ख़्म
का
चारा
नहीं
है
हमारे
पास
केवल
शा'इरी
है
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Sohil Barelvi
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हवा
को
इक
इशारा
कर
रहा
था
बुझी
लौ
को
शरारा
कर
रहा
था
रक़ीबों
को
गवारा
कर
रहा
था
तुम्हारे
बिन
गुज़ारा
कर
रहा
था
सभी
ने
फेर
लीं
नज़रें
मगर
मैं
तुम्हें
भी
तो
इशारा
कर
रहा
था
तुम्हारे
इश्क़
में
हारा
हुआ
फिर
वही
कोशिश
दोबारा
कर
रहा
था
भँवर
में
डूबने
से
वो
बचा
जो
किनारे
से
किनारा
कर
रहा
था
गुमाँ
बरकत
का
होता
था
मुझे
पर
हक़ीक़त
में
ख़सारा
कर
रहा
था
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Sohil Barelvi
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दीवार-ओ-दर
चुप
थे
सो
घर
की
घर
में
बात
रही
Sohil Barelvi
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दिलरुबा
ज़िंदगी
बे-वफ़ा
ज़िंदगी
खोज
में
मैं
तेरी
खो
गया
ज़िंदगी
जिस्म
है
या
कि
बुत
गुद-गुदा
ज़िंदगी
मौत
अब
टल
चुकी
पास
आ
ज़िंदगी
और
नज़दीक
आ
आ
भी
जा
ज़िंदगी
आज
मत
कर
मुझे
अनसुना
ज़िंदगी
ज़िंदगी
चाँस
है
हादसा
ज़िंदगी
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Sohil Barelvi
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