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Sohil Barelvi
raaz to aakhir khulna hai ab
raaz to aakhir khulna hai ab | राज़ तो आख़िर खुलना है अब
- Sohil Barelvi
राज़
तो
आख़िर
खुलना
है
अब
दो
रोगी
इक
चारा-गर
है
- Sohil Barelvi
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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वो
एक
राज़
जो
मुद्दत
से
राज़
था
ही
नहीं
उस
एक
राज़
से
पर्दा
उठा
दिया
गया
है
Aziz Nabeel
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अल्लाह
अल्लाह
हुस्न
की
ये
पर्दा-दारी
देखिए
भेद
जिस
ने
खोलना
चाहा
वो
दीवाना
हुआ
Arzoo Lakhnavi
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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रूहों
के
पर्दा-पोश
गुनाहों
से
बे-ख़बर
जिस्मों
की
नेकियाँ
ही
गिनाता
रहा
हूँ
मैं
Jaun Elia
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सजनी
की
आँखों
में
छुप
कर
जब
झाँका
बिन
होली
खेले
ही
साजन
भीग
गया
Musavvir Sabzwari
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चुप
रहते
हैं
चुप
रहने
दो
राज़
बताओ
खोले
क्या
बात
वफ़ा
की
तुम
करती
हो
बोलो
हम
कुछ
बोले
क्या
उल्फ़त
तो
अफ़साना
है
तुम
करती
खूब
सियासत
हो
हम
भी
हैं
मक़बूल
बहुत
अब
बोल
किसी
के
होलें
क्या
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Anand Raj Singh
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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तू
ने
ये
क्या
ग़ज़ब
किया
मुझ
को
भी
फ़ाश
कर
दिया
मैं
ही
तो
एक
राज़
था
सीना-ए-काएनात
में
Allama Iqbal
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सभी
से
राज़
कह
देता
हूँ
अपने
न
जाने
क्या
छुपाना
चाहता
हूँ
Shariq Kaifi
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आज
की
इक
ग़ज़ल
आप
सी
इक
ग़ज़ल
बन
गई
अब
मिरी
ज़िंदगी
इक
ग़ज़ल
ग़म-ज़दा
हाल
में
बे-बसी
इक
ग़ज़ल
याद
में
आपकी
हो
गई
इक
ग़ज़ल
शेर-ए-तर
है
सराब
तिश्नगी
इक
ग़ज़ल
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Sohil Barelvi
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दुनिया
का
इक
शख़्स
गया
है
सब
से
ज़ियादा
मुझ
को
दुख
है
Sohil Barelvi
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आँख
भरते
ही
छा
गए
बादल
मेरे
दिल
में
समा
गए
बादल
आज
फिर
से
नहीं
हुई
बारिश
बस
दिलासा
दिला
गए
बादल
इस
बरस
भी
न
लौटा
हरजाई
इस
बरस
भी
रुला
गए
बादल
मेरे
हिस्से
में
धूप
थी
पहले
आप
आए
तो
आ
गए
बादल
भीगते
वक़्त
आ
गया
रोना
याद
सब
कुछ
दिला
गए
बादल
मेरे
हिस्से
के
इस
बरस
सोहिल
किस
के
हिस्से
में
आ
गए
बादल
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Sohil Barelvi
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थोड़ी
ज़बान
कड़वी
हक़ीक़त
में
है
मेरी
लेकिन
मेरे
हबीब
मैं
दिल
का
बुरा
नहीं
Sohil Barelvi
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पासबाँ
हूँ
मैं
दोस्त
जिस
शय
का
वो
किसी
और
की
अमानत
है
Sohil Barelvi
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