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Sohil Barelvi
fer lete hain sab ke sab nazren
fer lete hain sab ke sab nazren | फेर लेते हैं सब के सब नज़रें
- Sohil Barelvi
फेर
लेते
हैं
सब
के
सब
नज़रें
आप
जब
काम
के
नहीं
रहते
- Sohil Barelvi
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शहीदों
का
यहाँ
पर
ख़ूँ
बहा
है
ज़मीं
पर
सिर्फ़
मिट्टी
ही
नहीं
है
Sohil Barelvi
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नीला
पड़ा
बदन
तो
मुझे
इल्म
अब
हुआ
कुछ
साँप
पल
रहे
थे
मिरी
आस्तीन
में
Sohil Barelvi
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एक
दीवान
ले
के
बैठे
हैं
क्या
ही
सामान
ले
के
बैठे
हैं
लौ
हथेली
पे
जल
रही
है
और
दिल
में
तूफ़ान
ले
के
बैठे
हैं
बस
मुझे
छोड़
कर
जहाँ
में
सब
काम
आसान
ले
के
बैठे
हैं
आप
के
दम
से
हूँ
मैं
जान-ए-मन
आप
ही
जान
ले
के
बैठे
हैं
ज़ब्त
कर
के
हज़ार
दुख
दिल
में
एक
मुस्कान
ले
के
बैठे
हैं
बाद
गिनने
के
कम
नहीं
होते
तारे
तो
जान
ले
के
बैठे
हैं
होंठ
सीकर
गली
से
गुज़रेंगे
सब
मकाँ
कान
ले
के
बैठे
हैं
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Sohil Barelvi
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घर
की
दहलीज़
पे
ज़माने
से
इक
उदासी
उदास
बैठी
है
Sohil Barelvi
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अपने
रूठे
मना
रहा
सोहिल
ख़ास
रिश्ते
बचा
रहा
सोहिल
इस
क़दर
लीन
हूँ
मोहब्बत
में
प्यार
दुश्मन
पे
आ
रहा
सोहिल
यार
नाराज़
है
बहुत!
मतलब
प्यार
की
सम्त
जा
रहा
सोहिल
पूरी
दुनिया
का
दुख
मेरे
घर
में
इक
दरीचे
से
आ
रहा
सोहिल
रोज़
लगता
है!
मुझ
को
अंदर
से
कोई
आसेब
खा
रहा
सोहिल
सिर्फ़
अपने
हैं
मेरे
दिल
में
फिर
कौन
दिल
को
दुखा
रहा
सोहिल
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Sohil Barelvi
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