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Sohil Barelvi
falak bhi sar-nigoon takne laga hai
falak bhi sar-nigoon takne laga hai | फ़लक भी सर-निगूँ तकने लगा है
- Sohil Barelvi
फ़लक
भी
सर-निगूँ
तकने
लगा
है
हम
अपने
पाँव
पर
चलने
लगे
हैं
- Sohil Barelvi
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वक़्त
आने
दे
दिखा
देंगे
तुझे
ऐ
आसमाँ
हम
अभी
से
क्यूँँ
बताएँ
क्या
हमारे
दिल
में
है
Bismil Azimabadi
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मुझे
मालूम
है
उस
का
ठिकाना
फिर
कहाँ
होगा
परिंदा
आसमाँ
छूने
में
जब
नाकाम
हो
जाए
Bashir Badr
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चाँद
को
देखकर
ये
लगता
है
तुम
मेरी
जान
आसमान
में
हो
Shajar Abbas
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वो
क़हर
था
कि
रात
का
पत्थर
पिघल
पड़ा
क्या
आतिशीं
गुलाब
खिला
आसमान
पर
Zafar Iqbal
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ये
आसमाँ
में
कोई
बुत
बैठा
भी
है
कि
नईं
या
हम
ज़मीं
के
लोग
यूँँ
ही
चीखते
हैं
बस
Siddharth Saaz
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परों
को
खोल
ज़माना
उड़ान
देखता
है
ज़मीं
पे
बैठ
के
क्या
आसमान
देखता
है
Shakeel Azmi
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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मेरी
हर
गुफ़्तगू
ज़मीं
से
रही
यूँँ
तो
फ़ुर्सत
में
आसमान
भी
था
Madan Mohan Danish
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देख
कैसे
धुल
गए
है
गिर्या-ओ-ज़ारी
के
बाद
आसमाँ
बारिश
के
बाद
और
मैं
अज़ादारी
के
बाद
इस
सेे
बढ़
कर
तो
तुझे
कोई
हुनर
आता
नहीं
सोचता
हूँ
क्या
करेगा
दिल
आज़ारी
के
बाद
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Abbas Tabish
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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मैं
किसी
तकलीफ़
में
हूँ
इन
दिनों
इस
दफ़ा
लेकिन
बताऊँगा
नहीं
Sohil Barelvi
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ज़रा
दूर
जाना
नहीं
चाहता
है
कोई
भी
ठिकाना
नहीं
चाहता
है
करे
है
कोई
चारा-गर
चाराजोई
दवा
भी
खिलाना
नहीं
चाहता
है
हुई
जब
से
वीरान
दिल
की
हवेली
कोई
आना
जाना
नहीं
चाहता
है
मेरी
तरह
ये
बाम-ओ-दर
और
घर
भी
कोई
मुस्कुराना
नहीं
चाहता
है
कई
बार
झाँसे
में
आया
मगर
अब
परिंदा
ठिकाना
नहीं
चाहता
है
सुख़न-गोई
जिस
दिन
से
रास
आई
दिल
को
ये
दुखड़े
सुनाना
नहीं
चाहता
है
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Sohil Barelvi
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लौट
जाता
कोई
आवाज़
तो
देता
मुझ
को
अब
मगर
और
ही
दुनिया
में
चला
आया
हूँ
Sohil Barelvi
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मौत
आने
के
बाद
समझेंगे
लोग
सारे
फ़साद
समझेंगे
आसमाँ
की
तरफ़
हैं
हाथ
मिरे
कैसे
पत्थर
मुराद
समझेंगे
आँख
में
जब
तलक
न
ख़ूँ
आए
तब
तलक
लोग
शाद
समझेंगे
साथ
रह
कर
नया
नहीं
!
केवल
आप
मेरा
निहाद
समझेंगे
आप
की
चोट
ख़ुद
पे
ले
लें
हम
आप
फिर
भी
इनाद
समझेंगे
आप
कितना
मुझे
समझ
पाए
मेरे
जाने
के
बाद
समझेंगे
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Sohil Barelvi
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आज
फिर
मौत
ने
दस्तकें
दी
मुझे
एक
दिन
दस्तकें
भी
न
आ
पाएँगी
Sohil Barelvi
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