क्या क्या और नज़र-अंदाज़ करूँँगा मैं

  - Sohil Barelvi
क्याक्याऔरनज़र-अंदाज़करूँँगामैं
कितनेपत्थरदिलपरऔररखूँगामैं
कूज़ागरकीमेहनतकामजाएगी
एकइकदिनकुछतोयारबनूँगामैं
एकइकदिनतूभीमुझकोसमझेगा
देखनाइकदिनदिलकीबातकहूँगामैं
तूजिसभीड़मेंमुझकोढूँढ़रहाहैअब
सबसेहटकेथोड़ीदूरमिलूँगामैं
इतनेरस्तोंसेअबवाक़िफ़हूँयारों
मंज़िलपालूँगाजिसओरचलूँगामैं
सबकेमनकीकरकेसुनकेपछताया
अबकेअपनेदिलकीयारसुनूँगामैं
जिसदिनतेरेकामनहींपाऊँगा
उसदिनतेरेदिलकोबहुतचुभूँगामैं
मुझसेसोहिलजिसजिसनेमुँहमोड़ाहै
सबसेइकदिनखुलकरयारमिलूँगामैं
  - Sohil Barelvi
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