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Sohil Barelvi
jis ka pahle se hi tay hai raasta
jis ka pahle se hi tay hai raasta | जिस का पहले से ही तय है रास्ता
- Sohil Barelvi
जिस
का
पहले
से
ही
तय
है
रास्ता
वो
हमारे
साथ
फिर
भी
चल
रहा
कुछ
लुटेरों
के
वो
हाथों
लग
गया
उम्र
भर
जो
ज़र
किया
मैं
ने
जमा
वो
भी
दौलत
है
भला
किस
काम
की
जिस
से
अपना
भी
नहीं
हो
फ़ायदा
आज
वो
भी
हो
गए
ओझल
कहीं
जिन
सितारों
को
मैं
अक्सर
देखता
बात
बिगड़ी
तो
बिगड़ती
जाएगी
बोलने
से
पहले
थोड़ा
सोचना
वो
किसी
की
ज़िंदगी
भी
बन
गए
सिर्फ़
करते
रह
गए
हम
तो
दु'आ
अब
शिकायत
भी
न
होगी
आपको
काम
आख़िर
आपके
मैं
आ
गया
आप
मेरे
साथ
तब
तक
चल
रहे
आप
के
मैं
साथ
जब
तक
चल
रहा
- Sohil Barelvi
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चाँद
सा
मिस्रा
अकेला
है
मिरे
काग़ज़
पर
छत
पे
आ
जाओ
मिरा
शे'र
मुकम्मल
कर
दो
Bashir Badr
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उस
के
होंटों
पे
रख
के
होंट
अपने
बात
ही
हम
तमाम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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अब
मिरा
ध्यान
कहीं
और
चला
जाता
है
अब
कोई
फ़िल्म
मुकम्मल
नहीं
देखी
जाती
Jawwad Sheikh
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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न
जाने
ख़त्म
हुई
कब
हमारी
आज़ादी
तअल्लुक़ात
की
पाबंदियाँ
निभाते
हुए
Azhar Iqbal
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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सोचता
हूँ
कि
उस
की
याद
आख़िर
अब
किसे
रात
भर
जगाती
है
Jaun Elia
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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किसी
बहाने
से
उसकी
नाराज़गी
ख़त्म
तो
करनी
थी
उसके
पसंदीदा
शाइर
के
शे'र
उसे
भिजवाए
हैं
Ali Zaryoun
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घर
की
दहलीज़
पे
ज़माने
से
इक
उदासी
उदास
बैठी
है
Sohil Barelvi
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दवा
को
रोक
दे
ऐ
चारा-गर
अब
हमारा
रोग
बढ़ता
जा
रहा
है
Sohil Barelvi
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वो
कहीं
और
हो
गया
मसरूफ़
मैं
भी
अपनी
तरफ़
चला
आया
Sohil Barelvi
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जब
भी
कोई
मुझे
बुलाता
है
और
ही
कोई
याद
आता
है
साथ
चलने
में
है
परेशानी
रास्ता
हर
कोई
दिखाता
है
आख़िरी
छोर
इस
उदासी
का
मेरे
दिल
के
ही
पास
आता
है
दिल
की
भट्टी
में
झोंक
कर
ईंधन
कोई
तो
रोटियाँ
पकाता
है
सिर्फ़
कहने
से
इस
ज़माने
में
कोई
वा'दा
नहीं
निभाता
है
जो
भी
आता
है
दिल
के
साहिल
पर
दो
घड़ी
को
ही
घर
बनाता
है
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Sohil Barelvi
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शक्ल
में
आपकी
मिली
मुझ
को
आज
ता'बीर
ख़्वाब
की
अपने
Sohil Barelvi
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