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Sohil Barelvi
jaan pahchaan ka nahin koii
jaan pahchaan ka nahin koii | जान पहचान का नहीं कोई
- Sohil Barelvi
जान
पहचान
का
नहीं
कोई
हम
से
नादान
का
नहीं
कोई
कैसे
मानूँ
कि
एक
भी
दुश्मन
अब
मिरी
जान
का
नहीं
कोई
सब
को
मिलना
है
सिर्फ़
राजा
से
और
दरबान
का
नहीं
कोई
दुख
तो
ये
है
कि
तू
नहीं
समझा
रंज
अपमान
का
नहीं
कोई
अजनबी
है
जहान
मेरे
लिए
मेरी
पहचान
का
नहीं
कोई
इश्क़
दुश्मन
है
जान
का
दुश्मन
खेल
मैदान
का
नहीं
कोई
साक़ी
तेरी
निगाह
चुंबक
है
दोष
रिंदान
का
नहीं
कोई
कीजिए
ख़र्च
वक़्त
को
ख़ुद
पर
काम
नुक़सान
का
नहीं
कोई
मौत
प्यारी
है
या
मियाँ
'सोहिल'
ध्यान
उनवान
का
नहीं
कोई
- Sohil Barelvi
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अपनी
तकलीफ़
पूरी
करने
को
मैंने
अपनों
का
दिल
दुखाया
है
Sohil Barelvi
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हर
रात
ख़त्म
होती
है
हर
सुब्ह-दम
शुरूअ
इस
ज़ाविये
से
देखता
हूँ
ज़िंदगी
को
मैं
Sohil Barelvi
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वो
तो
कुछ
सोच
समझ
कर
ही
गया
है
ऐ
दिल
तू
मगर
किस
लिए
बर्बाद
करे
है
ख़ुद
को
Sohil Barelvi
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मैं
रोने
के
अलावा
कुछ
दिनों
से
पुरानी
चैट
पढ़कर
हँस
रहा
हूँ
Sohil Barelvi
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बहुत
आवाज़
दी
लोगों
को
मैंने
बहुत
से
लोग
गुम
थे
लौटते
वक़्त
Sohil Barelvi
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