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Akash Kumar
yuñ kab tak karegi mujhe maaf tu
yuñ kab tak karegi mujhe maaf tu | यूँँ कब तक करेगी मुझे माफ़ तू
- Akash Kumar
यूँँ
कब
तक
करेगी
मुझे
माफ़
तू
तुझे
ज़ख़्म
पे
ज़ख़्म
मैं
दे
रहा
- Akash Kumar
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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जब
भी
उस
कूचे
में
जाना
पड़ता
है
ज़ख़्मों
पर
तेज़ाब
लगाना
पड़ता
है
उसके
घर
से
दूर
नहीं
है
मेरा
घर
रस्ते
में
पर
एक
ज़माना
पड़ता
है
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Subhan Asad
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तुम्हारी
याद
के
जब
ज़ख़्म
भरने
लगते
हैं
किसी
बहाने
तुम्हें
याद
करने
लगते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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एक
नज़र
देखते
तो
जाओ
मुझे
कब
कहा
है
गले
लगाओ
मुझे
तुमको
नुस्खा
भी
लिख
के
दे
दूँगा
ज़ख़्म
तो
ठीक
से
दिखाओ
मुझे
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Zia Mazkoor
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यूँँ
न
क़ातिल
को
जब
यक़ीं
आया
हम
ने
दिल
खोल
कर
दिखाई
चोट
Fani Badayuni
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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साँस
देकर
ज़िंदगी
देती
घुटन
भी
दूध
ख़ातिर
बेच
देते
साँप
फन
भी
छुट
गया
है
हाथ
ये
जब
से
किसी
से
सच
कहूँ
तो
ज़हर
लगता
है
मिलन
भी
हो
चुके
है
लोग
सस्ते
अब
बहुत
ही
दौर
ऐसा
है
कि
बिक
जाते
बदन
भी
आज़मा
उसको
बुरे
हालात
में
तू
आह
देगी
वाह
वाली
अंजुमन
भी
जब
कभी
इंसाफ़
देता
है
ख़ुदा
तो
वक़्त
पर
मिलता
नहीं
उसको
कफ़न
भी
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Akash Kumar
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इश्क़
के
ये
ज़िक्र
जब
तक
काश
से
है
क़ब्र
उसके
प्यार
की
तब
तक
सजेगी
Akash Kumar
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चाय
इतनी
भी
मीठी
कैसे
हो
सकती
है
उसके
होंठों
के
छुअन
में
कुछ
तो
जादू
था
Akash Kumar
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एक
तारीख़
कमबख़्त
खिसकी
नहीं
रात
ऐसी
मिली
सुब्ह
जिसकी
नहीं
Akash Kumar
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लौटकर
आवाज़
भर
से
लौट
आती
थी
कभी
चिट्ठियाँ
अब
भेजता
तो
हूँ
मगर
जाती
नहीं
Akash Kumar
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