kabhi tum mol lene ham koon hañs hañs bhaav karte ho | कभी तुम मोल लेने हम कूँ हँस हँस भाव करते हो

  - Siraj Aurangabadi
कभीतुममोललेनेहमकूँहँसहँसभावकरतेहो
कभीतीर-ए-निगाह-ए-तुंदकाबरसावकरतेहो
कभीतुमसर्दकरतेहोदिलोंकीआगगर्मीसीं
कभीतुमसर्द-मेहरीसींझटककरबावकरतेहो
कभीतुमसाफ़करतेहोमिरेदिलकीकुदूरतकूँ
कभीतुमबे-सबबतेवरीचढ़ाकरतावकरतेहो
कभीतुममोमहोजातेहोजबमैंगर्महोताहूँ
कभीमैंसर्दहोताहूँतोतुमभड़कावकरतेहो
कभीलालामुझेदेतेहोअपनेहातसींप्याला
कभीतुमशीशा-ए-दिलपरमिरेपथरावकरतेहो
कभीतुमधूलउड़ातेहोमिरीग़ुस्सेसींरूखेहो
कभीमुँहपरहयाकालाअरक़छिड़कावकरतेहो
कभीख़ुशहोकेकरतेहो'सिराज'अपनेकीजाँ-बख़्शी
कभीउसकेबुझादेनेकूँक्याक्यादावकरतेहो
  - Siraj Aurangabadi
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