sochte ho kyun jo hasrat soch rakkhi hai | सोचते हो क्यूँँ जो हसरत सोच रक्खी है

  - Prashant Singh
सोचतेहोक्यूँँजोहसरतसोचरक्खीहै
सोचकरदेखोजोउल्फ़तसोचरक्खीहै
वोअगरचाहेतोमुश्किलहोनहींकुछभी
हाथमेंउसकेहैनेमतसोचरक्खीहै
क्यूँँदशाननचाहताहैस्वर्गकीसीढ़ी
रामनेधरतीकोजन्नतसोचरक्खीहै
धानकीख़ुशबूतुम्हेंयूँँमिलनहींसकती
भालपेमिट्टीकीरंगतसोचरक्खीहै
मैंलुटानाचाहताहूँआमकोदौलत
पासमेंहर्फ़ोंकीदौलतसोचरक्खीहै
  - Prashant Singh
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