maanta hooñ main ki ye izhaar uskaa tha nahin | मानता हूँ मैं कि ये इज़हार उसका था नहीं

  - Shubhangi Bharti
मानताहूँमैंकियेइज़हारउसकाथानहीं
परनहींकहनाकिमैंहक़दारउसकाथानहीं
इकसदीकासाथतोथाउसकेमेरेदरमियाँ
फिरउसेयेक्यूँँलगामैंप्यारउसकाथानहीं
तोड़नेकोयेखिलौनाहीमिलाथाक्याउसे
क्यूँँकियाउसनेयेदिलव्यापारउसकाथानहीं
मैंभलाकैसेसमझपाताकिसीकीचालको
यारआँखोंमेंकभीइनकारउसकाथानहीं
सौदिलासोंकामैंआख़िरक्याकरूँँगायेकहो
जानताहूँमैंअभीमैंप्यारउसकाथानहीं
भारतीयेज़िंदगीहरदिननईहोगीयहाँ
जोनहींहैपासतूहक़दारउसकाथानहीं
  - Shubhangi Bharti
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