ख़ुद को मर्यादा में ही रखना मुसलसल काम है

  - Shubhangi Bharti
ख़ुदकोमर्यादामेंहीरखनामुसलसलकामहै
ज़िंदगीकीधूपकोसहनामुसलसलकामहै
खींचलेनेसेदुपट्टाप्यारहोजाताहैक्या
प्यारमेंतोआबरुढंँकनामुसलसलकामहै
रोज़हरदहलीज़परजानानहींलगतासही
एकमंज़िलपेअडिगरहनामुसलसलकामहै
झूठकीता'रीफ़सेचेहरेबदलतेहैंनहीं
जोसहीलगताहैवोकहनामुसलसलकामहै
रातकोभीचांँदनीसेहैज़रारंजिशअभी
फिरभीदेखोसाथमेंरहनामुसलसलकामहै
यूँँंँदरख़्तोंकोअभीकाटोनहींछोड़ोइसे
ज़िंदगीहैएकदिनमरनामुसलसलकामहै
  - Shubhangi Bharti
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